आज आईआईटी का नतीजा आया. डर और धबराहट के मारे अखिल की हालत खस्ता थी.असल मे वो बहुत साधारण से परिवार से था. पिता ने उसके कहने पर अपनी एफडी खुलवा ली थी ताकि टयूशन और किताबो का खर्चा निकल जाए पर साथ ही साथ उसे हिदायत भी दे दी थी कि अगर किसी भी वजह से वो पास ना कर पाया तो कबाडी वाला ही बनना पडेगा क्योकि अब बैंक मे कोई रुपया पैसा नही है. मेहनत तो की थी पर आज नतीजा आने वाला है क्या होगा यही सोच सोच कर उसका दिल जोर जोर धडक रहा था. सुबह के आठ बजे थे.
अचानक सडक पर कबाड बेचने वाले की आवाज आई. रद्दी ,अखबार बेच लो. कबाड वाला …!!!
एक दम से सन्नाटा सा छा गया और तभी अखिल के घर से ठहाके की आवाज गूंज उठी. वो ना सिर्फ पास हो गया था बल्कि टाप 100 मे उसका रैंक आया था. जैसे ही उसने अपने पापा मे पावं छुए. नम आखो से उन्होने उसे गले से लगा लिया.
मोनिका गुप्ता
http://www.facebook.com/linkmonicagupta
| Filed Under: कहानी Tagged with आई आईटी, आईआईटी, एआई ई ई, कबाडी, कहानी, नतीजा, परीक्षा, पास, ब्लाग, भाग्य, मेहबत, मोनिका गुप्ता, सम्मान, सिरसा |
मेहमान !!!
मदर्स डे के उपलक्ष मे रवि मोहन बहुत व्यस्त चल रहे थे. जगह जगह उनकी माँ के बारे मे कविताए, विचार वाहवाही बटोर रहे थे.इसी सिलसिले मे आज उन्हे श्रेष्ठ रचानाकार के रुप मे भी सम्म्मनित किया जाना था.अपने लेखो का पुलिंदा लिए वो वहां पहुच चुके थे. तभी घर से मैसेज आया कि मेहमान आ गए है. धंटा भर अपनी रचनाए सांझा करने के बाद उन्होने आयोजको से कहा कि उनके घर मेहमान आए है इसलिए जाना पडेगा.एक आयोजक ने ऐसे ही पूछ लिया कि कौन “मेहमान” तो वो बोले, “माँ” आई है.सभी आयोजको के चेहरे का रंग उतर गया.जो व्यक्ति इतनी बढ चढ कर बाते बना रहा था. माँ को भगवान का दर्जा दे रहा था. असल जिंदगी मे माँ उसके लिए सिर्फ एक “मेहमान” स्वरुप ही है..!!:(
मोनिका गुप्ता
http://www.facebook.com/linkmonicagupta
| Filed Under: कहानी , Sattires , Social Issues , Thoughts Tagged with अबला, कहानी, नारी, ब्लाग, भगवान. माता, मदर्स डे, मा क दिन, मेहमान, मोनिका गुप्ता, लघु कथा, लेखिका, सिरसा, हरियाणा. खबरे, हास्य |
कहानी निशब्द
वैसे तो मणि की हर रोज ही अपनी मम्मी से फोन पर बात होती रहती थी पर आज जो बात हुई उससे अचानक उसका गला भर आया.
असल मे, पिछ्ले साल जब वो मम्मी से मिलने दिल्ली गई तो वहां घर के बाहर गली मे एक पतला दुबला भूरे से रंग का कुत्ता दिखा.मणि ने उसे आदत के अनुसार रोटी के टुकडे दे दिए. इस पर उसकी मम्मी ने गुस्सा किया कि ऐसे तो यह हर रोज आएगा और उसे हुश हुश करके भगा दिया.इस पर मणि ने अपनी नाराजगी जाहिर कि क्या है मम्मी..!! क्या हुआ अगर जरा सा कुछ खाने को दे दिया. आप तो इतनी प्यारी हो इतना सबका ख्याल रखती हो फिर इससे इतना!!! मम्मी ने बात अनसुनी कर दी और उसे भगा दिया. जब भी वो दिखता मम्मी का पारा हाई हो जाता और वो भी मम्मी को देखते ही भागना शुरु कर देता.
मणि जब भी समझाती तो उसे डांट ही पडती.कुछ समय बाद जब मणि का फिर दिल्ली जाना हुआ तो फिर वही कुत्ता दिखा. पर इस बार उसे उसकी आखों के नीचे काले काले घेरे दिखाई दिए. मणि ने अपनी मम्मी से नजर बचा कर उसे रोटी दी और उसने पहले ना नुकुर की पर कुछ देर बाद मणि ने देखा तो वो किसी कार के नीचे बैठा रोटी खा रहा था. मणि मे मम्मी को बताया कि आपके डर से इसके आखों के नीचे काले गड्डे भी हो गए हैं. इस पर मम्मी मे फिर मणि को कहा कि तू उसकी तरफदारी कर रही है. पिटेगी तू मुझसे !! बात आई गई हो गई.
आज सुबह अष्टमी की पूजा करने के बाद मणि की मम्मी का फोन आया. मम्मी ने बताया कि तेरे वाला कुत्ता बीमार है.मणि सुनते ही हैरान रह गई कि मम्मी उस कुत्ते की बात कर रही है जिसे वो सख्त नफरत् करती हैं मम्मी बता रही थी कि दो दिन से उसके भौंकने की आवाज ठीक नही लग रही थी और कल तो वो उन्हे देख कर भागा भी नही जैसे अक्सर भाग जाता था. जानबूझ कर वो एक दो बार बाहर गई पर वो बैठा ही रहा.फिर उन्होने इधर उधर फोन किए और जानवरो के डाक्टर का नम्बर लिया.वो दो बजे गाडी मे आए और उसका इलाज करवाने ले गए है.बात करते करते मम्मी ने पूछा हैल्लो, बेटा आवाज आ रही है ना !!! हैलो !!! पर मणि निशब्द थी.आखो से झर झर पानी ही बहे जा रहा था.वो सोच रही थी सच मे, यही होती है “मां”. मां भी शायद बेटी की चुप्पी को पहचान गई थी.
मोनिका गुप्ता
http://www.facebook.com/linkmonicagupta
| Filed Under: article , कहानी , लेख , General , Social Issues Tagged with कहानी, कुत्ता, जानवर, निशब्द, प्यार, भारत, मम्मी, मोनिका गुप्ता, लेख, सिरसा, हरियाणा, हास्य |
एक कहानी जिंदगी की …
मणि का बेटा होस्टल जाने के लिए तैयार था पर मणि का काम ही खत्म नही हो रहा था.कभी कपडे धोने बाथरुम मे चली जाती तो कभी रसोई मे जाकर प्याज काटने लगती.कैसे कैसे बहाने करके बस अपने आसूओ को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी. किसी से बात ना करने के चक्कर मे अपना मोबाईल भी उसने साईलेंट पर रख छोडा था. बेटे को बस स्टाप छोडने की बात हुई तो बहाना बना दिया कि काम वाली किसी भी समय आ सकती है. ताला देख कर लौट ना जाए.
जाते जाते बेटा जब आशीर्वाद लेने आया तो चोरी चोरी मां की आखो मे देख ही लिया. मणि इसके लिए भी तैयार थी बोली बदलता मौसम है ना आज नाक और आखो से पानी बहुत बह रहा है.छीके भी बहुत आ रही है कहती हुई मुस्कुरा दी.बेटा चला गया और वो चुपचाप उदास मन से कमरे मे आकर बैठ गई.
इतने मे बेटॆ का मैसेज आया ” क्या मम्मी आपको तो झूठ बोलना भी नही आता. अपना ख्याल रखना और मै भी अपना ख्याल रखूगा” लव यू
!!! वैसे आप स्माईल करती ही अच्छी लगती हो !!
अब मणि खुल कर रो रही थी!
| Filed Under: article , कहानी , General Tagged with जरुरी, पढाई, प्यार, मा का प्यार, माता पिता, मोनिका गुप्ता, रिश्ता, लेखिका, सिरसा, हरियाणा, होस्टल बेटा |
भाई साहब ….!!!
मोहन कुमार बार बार अपना मोबाईल और लैंड लाईन चैक कर रहे थे क्योकि बहुत समय से कोई फोन की घंटी नही बजी थी.उन्हे लग रहा था कि फोन मे शायद कोई गडबडी ना हो पर सब ठीक था.अभी चार दिन ही हुए है उन्हे रिटायर हुए. शहर मे बहुत अच्छे सरकारी ओहदे पर थे वो.
नौकरी के दौरान उन्हे ना दिन का चैन ना रात की नींद .. हर समय वक्त बेवक्त बस जान पहचान नाते रिश्तेदारो के फोन ही घनघनाते रहते.
भाई साहब… आपकी गुडिया की शादी है जरुर आना है और हां अगर सात आठ गैस सिलेंडर का इंतजाम हो जाता तो..!
भाई साहब… हम आज सपरिवार आपसे मिलने आ रहे है हफ्ता भर रुकेंगें.
भाई साहब … पासपोर्ट बनवाना है जल्दी. मुन्ना विदेश जाने की सोच रहा है .. आप साईन कर देना.
भाई साहब… चाची बीमार है सोच रहे हैं कि आपके पास ले आए आप सरकारी अस्पताल मे कह कर अच्छा इलाज करवा दोगें .
भाई साहब … सुना है आपके एरिया मे जमीन बिक रही है जरा सस्ते मे सौदा करवा दो .. !!
भाई साहब … आपके भतीजे को जेल हो गई है . जरा जज से बात करके मामला रफा दफा तो करवा दो.
मोहन कुमार यानि भाई साहब ख्यालो मे ही गुमसुम थे कि अचानक टेलिफोन की घंटी बजी. उनके चेहरे पर खुशी दौड गई.गला साफ करते हुए उन्होने फोन उठाया पर शायद वो गलत नम्बर था… !!
| Filed Under: कहानी , लेख , General , Social Issues Tagged with कहानी, नव भारत टाईम्स, बुढापा, ब्लाग, मजाक, मोनिका गुप्ता, लघु कथा, व्यंग्य, सरकारी नौकरी, सिरसा, हरियाणा, हास्य, हिंदी मे कहानी |



