लो कर लो बात !!! सुबह से क्या कम झटके लग रहे थे कि बैठे बैठाए एक और झटका लग गया. अभी तो सुबह से अन्ना टीम के अरविंद साहब ने दिए तो अभी अभी क्रिकेट टीम ने जबरदस्त झटका दे दिया और कोई ऐईसा वैईसा नही भारत ने सीधा सीधा क्रिकेट इतिहास मे सबसे तेज जीत हासिल की है.ऑस्ट्रेलिया दौरे में अब तक बुरी तरह से फ्लॉप रही टीम इंडिया ने ट्राइएंगुलर सीरीज के अपने अंतिम मैच में श्रीलंका के खिलाफ बोनस पॉइंट के साथ जीत दर्ज करके खुद को फाइनल की होड़ में बनाए रखा है. उसने अपने अंतिम लीग मैच में 321 रन के लक्ष्य को 36.4 ओवर में हासिल करते हुए श्रीलंका को 7 विकेट से हरा दिया. जोर का झटका जोर से ही लगा…!!!
मोनिका गुप्ता
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ये क्या हो रहा है !!! 
आज सुबह से कुछ ऐसा धटना क्रम बंधा कि समझ नही आ रहा है कि क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए अन्ना टीम के अरविंद गोवा जाने के लिए निकलना चाह्ते थे.वोट जागरुकता अभियान चला रहे अरविंद जी के लिए वोट देना प्राथमिकता नही थी. इस कारण वोट की अहमियत को बिना समझे! जी हां बिना वोट की अहमियत को बिना समझे वो गोवा जा रहे थे.पर मीडिया मे इस कदर खबर दिखाई गई कि अरविंद केजरीवाल अब वापिस लौट रहे है और वोट देकर ही जाएगे.
इस संदर्भ मे बहुत प्रतिक्रिया आई. पर कुल मिला कर निचोड यही निकला कि जो टीम अन्ना के समर्थक थे उनमे एक निराशा के भाव थे.और कुछ कहते नही बन रहा था कि इन्होने ऐसा क्यो किया. विरोधी स्वर तो बुलंद ही थे और उन्हे बोलने का पूरा मौका मिल गया था.
बेशक आज मीडिया ने बहुत अच्छा काम किया पर अन्ना टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य से जोकि बहुत लोगो के प्रेरक भी हैं ऐसी ना समझी की उम्मीद नही थी. इसलिए जहां बहुत बुरा लग रहा है वही खुशी भी है कि मीडिया मे बहुत शक्ति है !!
पर पूरे धटना क्रम को देखते ही बार बार मुहं से यही निकल रहा है कि अरे ये क्या हो रहा है !!! ये क्या हो रहा हैं!!!
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लेख … ये कहां आ गए हम !! ( महिला दिवस पर खास)
ये कहां आ गए हम यू ही साथ चलते चलते.!!! मेरा यह लेख सभी महिला दोस्तो के लिए है कि आज हम कहां से कहां आ गए है.इसमे कोई शक नही है कि घर की चार दीवारी से बाहर नई दुनिया मे कदम रखा है अपनी एक नई पहचान भी बनाई है पर क्या आप खुश है या आपका परिवार आपसे खुश है …!!बहुत परिवारो से बात करने के बाद आपके सामने मै कुछ उदाहरण रख रही हूं.
पहली कहानी… राजीव अपनी पत्नी को आवाज देते हुए कहता है कि आफिस जा रही हो तो जरा समय निकाल कर बैंक भी चली जाना .दो चार काम है मै फोन करके बता दूगां और हाँ, गैस एजेंसी भी पास ही है गैस बुक करवाती आना. गैस खत्म हो गई तो मुझे मत कहना कुछ!!!
दूसरी कहानी….रेखा हर रोज दफ्तर के लिए लेट हो जाती है कारण है कि वो बच्चो को छोडकर वही से आटो लेती है पर बच्चो की बस अक्सर 10 मिनट देरी से आती है और रोज उसे देर से आने की उपाघि मिलती है कितनी बार उसने अपने पति को बोला कि आप बच्चो को स्टाप तक छोड आया करो लेकिन जवाब मे सिवाय तनाव के कुछ नही मिलता.वो हमेशा तुनक कर बोलते है कि मेरे पास समय नही है.
तीसरी कहानी….अमिता के काफी दिन से कमर मे दर्द चल रहा है. दवाई लेती रही पर आराम नही मिल रहा. ननद की शादी मे छुट्टी इतनी ले ली थी कि अब छुट्टी नही मिल रही और घर मे मेहमानो का जमावडा है पर कोई मदद नही करवाता पर गलती निकालने और परेशान करने मे सब आगे हैं.
चौथी कहानी ….राज और किरण ने लाईफ स्टाईल अच्छा दिखाने के चक्कर मे बैंक से लोन ले लिया.दोस्तो से कर्जा भी ले लिया. अब दिन रात यही चिंता है कि कैसे उतारेगे सब. लेन दारो के भी फोन आते रहते है दिन रात.सुबह शाम घर मे तनाव का ही माहौल बना रहत है. पति पत्नी आपस मे बात कम और झगडते ज्यादा है. इस वजह से बच्चे बहुत डरे डरे रहने लगे हैं.
पांचवी कहानी … अच्छी शिक्षा के लिए बच्चो को होस्टल भेज दिया. खुद दिन रात काम मे उलझी रहती है काम मे. बच्चो मे अपनी मम्मी के लिए प्यार नाम की कोई चीज ही नही रही.भले ही आप उनका अच्छा भविष्य सोच रही है लेकिन बच्चे …!!
छ्ठी कहानी… नम्रता कोई नौकरी वौकरी नही करती पर सारा दिन घर पर रहना बच्चो की देखभाल करना…!!! अच्छा नही लगता जरा धूमने फिरने की आदी है. इसलिए नन्ही बच्ची को घरेलू नौकर के हवाले करके किट्टी पार्टी मे निकल जाती है..!! नतीजा आपको बताने की जरुरत नही..
सातवी कहानी ….सुधा और रवि शादी के बाद से ही काम कर रहे है.रवि के किसी दोस्त का कार्ड या कोई निमंत्रण आता है तो वो खुशी खुशी जाती है पर उधर सुधा के पास उसके दफ्तर मे कोई उसके नाम से कार्ड आता है तो रवि बुरा सा मुहं बना लेता है कि तुम्हे ही बुलाया है. इस पर अक्सर काफी बहस होती है पर नतीजा तनाव, कुछ समय के लिए बोल चाल बंद और बस …!!!
आठंवी कहनी ….. मोहिनी को अपनी नौकरी पर इतना गुमान हो गया है कि अक्सर अपने पति शोभित से भी बतमीजी कर जाती है और तो और पूरा मन बना लिया है उसने कि वो उसे तलाक देकर ठाठ से रहेगी.
नौवी कहानी … दीपा और सूरज की शादी को पंद्रह साल हो गए है. शादी के बाद से ही दोनो अलग रह रहे है झगडे ही वजह से नही बल्कि दीपा अपनी नौकरी नही छोड सकती और सूरज का तो मतलब ही नही. महीने दो महीने मे एक आध बार मिलना हो जाता है बस.. ऐसे ही चल रही है उनकी गाडी.बच्चे बचपन से ही होस्टल् मे हैं.
ऐसी ना जाने कितनी कहानियां है जिससे हम या हमारे परिवार रोज गुजर रहे है.हर परिवार की अपनी अपनी प्राथमिकताए है. जरुरत है उस पर खरा उतरने की.आज के समय मे बहुत सोच समझ कर चलने की जरुरत है. परिवार के सदस्यो मे अपना अलग स्थान बनाने की जरुरत है. बच्चो को सही प्यार और ध्यान देने की जरुरत है पर पता नही हम किस बहाव मे बहे जा रही है और मजे की बात तो ये है कि कोई हमसे खुश भी नही है और शायद कही ना कही हम भी अपने से खुश नही है.
आज फिल्मो मे जितना वो अंग प्रदर्शन करेगी उतना ही काम मिलेगा और तो और खुद को सभ्य दिखाने की होड मे देर रात पार्टी मे तो रहती ही है नशा भी करने लगी है.क्या हो गया??? अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम कभी भी अपने परिवार और बच्चो के लिए आदर्श नही बन पाएगें. उल्टा उन्हे ही शर्म आएगी हमे अपना कहने में.
इसमे भी कोई दो राय नही कि अपवाद हर क्षेत्र् मे होते है पर जितनी महिलाओ या जितने परिवारो से मै मिली हूं यह बात उनसे ही सुनी हैं यह दर्द उनकी ही बातो से उभर कर आया है.इसलिए आज जरुरत खुद को टटोलने की और सही राह चुनने की.ताकि यह बात फिर ना उभरे कि ये कहां आ गए हम !!!
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सुविचार …
कोई risk ना लेना ही जिंदगी का सबसे बड़ा risk है …!!! .
किसी को ट्क्कर देकर गिराने की बजाय किसी गिरते हुए को टेक देकर उठाना ज्यादा बेहतर है …. है ना !!!
कोई Poison Positive thinker को नही मार सकता और कोई Medicine Negative thinker का इलाज नही कर सकती …!!!THINK …!!!
चेहरा देना कुदरत का काम है और उसे सुंदर भाव देना हमारा!!! और अगर उस पर मुस्कुराहट तो हो क्या कहने !!! तो क्या सोचा !!!
अक्सर नेट पर बहुत बाते पढने देखने को मिल जाती है कई बार खुशी तो कई बार हैरानी भी होती है ..!!!आमतौर पर हम सभी अच्छा बनना चाह्ते हैं पर मैने जो पढा उसमे कुछ इस तरह लिखा था …ये अच्छा है कि खुदा ने हमे अच्छा नही बनाया …. कम से कम किसी को दुख नही होगा हमसे बिछडने के बाद !!! हे भगवान लोग भी ना जाने क्या क्या सोचते हैं!!!
monica gupta
sirsa
haryana
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