May

10

कविता … पहचान

Posted By: monicagupta on May 10, 2012 at 8:04 pm

 पहचान

 

नन्हू की चाची

दिव्या की मौसी

गीता की ताई

नीरु की आंटी

जमुना की बाई जी

दीप की भाभी

लीना की देवरानी

रानो की जेठानी

सासू माँ की बहू रानी

माँ की मोना

पति की सुनती हो

रामू की बीबी जी

मणि की मम्मी

इन नामो से मेरी

 

पहचान कही गुम हो गई

एक दिन

आईने के आगे

खुद को जानने की कोशिश की

तो

मुस्कुरा दिया आईना

और बोला

मेरी नजरो मे ना तुम

चाची हो ना ताई

ना भाभी हो ना बाई

बस

 

तुम सिर्फ तुम हो

सादगी की मूरत

दयालुता की प्रतीक

प्रेम की देवी

 

ईश्वर का प्रतिबिम्ब

 

बस …

तभी से अपने पास

आईना रखने लगी हूं

ताकि पहचान धुंधलाने पर

उसके अक्स मे खुद को जान सकू

पहचान सकू….

कि मैं भी कुछ हूं

कि मैं भी कुछ हूं ….

 

मोनिका गुप्ता 

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सिरसा 

हरियाणा 

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May

10

Nice thoughts …!!!

Posted By: monicagupta on May 10, 2012 at 4:35 pm

Nice thoughts …!!!

 

 

सिर्फ दो तरह के लोग नसीब वाले होते हैं …पहले वो जिनके अच्छे और सच्चे “दोस्त” होते हैं और दूसरे वो जिनके साथ “माँ” का आशीर्वाद साथ होता है …..hmmmmm यकीनन बात मे दम है !! …. है ना !!! :)

 

हैरानी होती है कि “बुरी “बातें और विचार हमे तुरंत आकर्षित या प्रभावित कर लेती है पर वही दूसरी ओर “अच्छी” बाते और अच्छे विचार ……..!!! (हुंह) :)

 

Oh !!!तो आप जीवन से बिल्कुल हार मान चुके हैं.कोई उम्मीद की किरण नजर नही आ रही है.ऐसा हो जाता है कई बार !! पर पर पर … एक बार, बस, एक बार Quit करने से पहले, सिर्फ आखिरी बार कुछ अलग तरीके से उसी बात को या उस काम को अंजाम दे कर देखिए… हो सकता है कि इस बार भाग्य आपका साथ दे जाए. वैसे भी कई बार last ball पर चौका या छ्क्का लग जाया करता है!! तो सोचना नही है बस मन मे पूरा आत्मविश्वास भर के कर दिखाना है …!!! है ना !! :)

 

सफलता मिलने के बाद भी आराम नही करना चाहिए बल्कि लगातार काम मे ही जुटे रहना चाहिए क्योकि अगर आप किसी वजह से आप किसी मे सफल नही हो पाए तो लोगो को और आपको रिश्तेदारो को कहने का मौका मिल जाएगा कि पहली सफलता तो आपको luckily या by chance ही मिली थी… वैसे लोगो के कहने की चिंता तो नही करनी चाहिए पर यह जरुरी है कि सफलता के बाद भी अपने कार्य मे तल्लीनता से जुटे रहे!!! तो क्या सोचा !!!

 

ऐसी बहुत सारी चीजे है जो हमे खुशी दे जाती है तो उन छोटी छोटी बातो पर ध्यान किसलिए देना जो हमे दुखी कर जाती हैंंं है ना !! तो क्या सोचा !!

 

Important यह नही है कि आप Beauitful हो पर Beauitful यह है कि आप Important हो !!! तो बनना है ना Beauitful यानि Important ….!!! :)
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May

10

Mothers day !!!!

Posted By: monicagupta on May 10, 2012 at 4:30 pm

Mothers  day  !!!!

 

समय वाकई मे बदल रहा है. मदर्स डे के उपलक्ष मे जब बच्चो से उनके विचार जाने तो कुछ बच्चो की बातो ने सोचने पर मजबूर कर दिया.

निक्की जोकि 6क्लास मे है उसने बताया कि उसकी मम्मी नौकरी करती हैं और आफिस दूर होने की वजह से वो जल्दी ही निकल जाती है और घर पर ताला लगाकर वो स्कूल जाती है और दोपहर को भी ताला ही मिलता है. मम्मी पापा देर शाम तक आते है.

वही 10वी क्लास के अक्षय ने बताया कि वो तो बचपन से ही होस्टल मे रह रहा है और छुट्टियो मे ही घर जाता है पर दोस्तो के साथ रहना ज्यादा अच्छा लगता है

पलक ने बताया कि उसकी मम्मी हाऊस वाईफ है पर किटी पार्टी और सोशल वर्क के साथ साथ मोबाईल और नेट पर ज्यादा रहती है इसलिए उन्हे ई कार्ड भी भेजूगी.मासूमो की बात सुनकर लगा कि वाकई आज मायने बदल रहे है वैसे चाहे कुछ भी हो जब तक बच्चे छोटे हो प्राथमिकता घर परिवार ही होनी चाहिए! है ना !!

monica gupta

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May

09

लेख … मदर्स डे

Posted By: monicagupta on May 9, 2012 at 4:19 pm

तुझे सब है पता, मेरी मां …

 

मेरे विचार से हम जितना प्यार अपनी मम्मी से करते है उतनी ही डांट भी उनसे खाते हैं और डाटं खाने पर  हमारी आखों मे आसूं देखने के बाद उनकी आखॆ भी छ्लछ्ला आती है वो वाकई मे देखने वाला सीन होता है जब वो फिर सीने से लगा कर या गाल पकड कर कह उठती है कि फिर क्यो गुस्सा दिलाया था मुझे  और प्यार से हमारी आखो के आसूं पोछ् कर  गालो पर प्यार की एक और चपत लगाती हैं.

यह बात मै एक मां होने के नाते और एक बेटी होने के नाते अपने अनुभव से कह सकती हूं.वैसे मदर्स डे के उपलक्ष मे मैने बहुत दोस्तो मे बात की और उनके अनुभव जाने.

 

रविंद्र ने बताया कि उन्हे हमेशा इस बात के लिए डांट पडती थी कि वो कभी भी टिफिन नही खत्म करते थे. घर आकर मम्मी से यही डांट पडती कि अगर खाते नही हो तो बनवाते क्यो हो. कल से मै नही बनाऊगी पर जब वो आफिस जाते तो टिफिन तैयार रखा होता.

 

मीना कुमारी ने बताया कि जब भी मम्मी कहती फलां काम कर लो तो मै कहती अभी कर रही हू पर वो अभी कभी नही आता और मम्मी को खुद ही वो काम करना पडता और उसे  डांट भी खानी पडती. कहते कहते मीना खिलखिला कर हस दी.

दीपक ने बताया कि वो अभी 12 क्लास मे है. सुबह से स्कूल ट्यूशन इतना प्रशेर हो जाता है कि जब घर वापिस आता तो लगता पहले अपनी ईमेल चैक कर लू. पर जैसे ही कम्प्यूटर खोला नही कि डांट पडनी शुरु. लो हो गई पढाई. क्या यही कम्प्यूटर और ये दोस्त पास करवाएगे तुझे !! घर आया नही कपडे बदलने नही और इसे खोल लिया.हुंह !!!

अनु से जब पूछा तो हंसती हुई बोली कि मम्मी से डांट खाने की बहुत सी बाते है पर एक बात पर हमेशा डांट पडती थी वो ये कि उसे ढोलू मे दूध  लाना जरा भी पसंद नही था अक्सर मम्मी और उसकी इसी बात पर लडाई होती थी. मम्मी कहती कि वैसे तो सारा दिन बाजार मे घूमती रहेगी और काम करने के नाम पर ….. उसने बताया कि वो कुछ भी कर सकती है पर  बाजार से दूध  लेकर आना वो भी ढोलू मे उसे कभी  पसंद नही था. अक्सर पापा साथ देते तो वो बच जाती थी.

मणि ने बताया कि बचपन मे उसे धांसू मार पडती थी. असल मे वो शरारती थी तो डांट पडनी भी चाहिए पर उसकी मम्मी पहले ही बोल देती थी कि मारुगी दो और गिनूगी एक… कह कर वो जोर से हसने लगी और अचानक आखे नम हो गई.सच, बचपन के दिन भी क्या दिन थे.

राजेश ने बताया कि बचपन मे उसकी मम्मी धमकी देती थी कि शरारत की  तो पापा से शिकायत करुगी और पापा से वो खुद बहुत डरते थे बस पापा का नाम लेते ही वो चुपचाप बैठ जाया करते थे.

 

ऋतु ने बताया कि उनके घर मेहमान बहुत आते रहते है और अक्सर  मेहमानो के आने से मम्मी को बहुत टॆंशन हो जाती. रसोई और ड्रांइग रुम मे तो मानो कर्फ्यू ही लग जाता. अगर एक चीज भी इधर से उधर हो जाती तो हमारी शामत आती.हालाकि पापा समेत हम सभी मम्मी को समझाते कि टेंशन मत लिया करो पर वो तो मम्मी है ना… बताती हुई वो मुस्कुरा दी और बोली कि मम्मी का असर अब उसमे भी आ गया है और जोर से हसंने लगी.

अब जब भी उनके घर मे मेहमान आते हैं तो उसे भी बहुत टेंशन हो जाती है.

 

तो देखा तरह तरह की बाते और उनके अनुभव. बाते तो और भी बहुत सारी है पर सभी बातो का सार यही निकला कि चाहे मम्मी से कितनी डांट पडे या मम्मी गुस्सा हो पर घर मे कदम रखते ही हमे घर पर मम्मी चाहिए होती है कि वो हमारा भारी भरकम स्कूल बैग कंधे से उतारे, हमारे बालो मे प्यार से हाथ फेरे. आज हमारे साथ क्या क्या हुआ सारी बाते सुने और खाना गर्म करके हमे खिलाए और हमे अलार्म घडी की तरह थोडी देर मे गहरी नींद से उठा दे ताकि हम अपनी अगली दिनचर्या के लिए तरोताजा हो जाए.

 

जो भी है किसी ने सच ही लिखा है कि भगवान का कर जगह जाना सम्भव नही था इसलिए उसने मां को बना दिया.. हमारी तबियत ठीक ना हो तो रात भर जाग कर ही निकालती है वो.दर्द हमे होता है और आखे उनकी नम होती हैं लौटने मे जरा सी देर हो जाए तो फोन पर फोन आने शुरु हो जाते है कि क्या  हुआ. कई बार हमारे झूठ भी छिपाती हैं. हमारे लिए ताजा खाना बनाएगी  और खुद दो दिन का रखा बासी खाना बहुत शौक से खाएगीं.एक नही ऐसे सैकडो उदाहरण है इस ममतामयी मां के.

 

एक छोटा बच्चा नया नया स्कूल मे भर्ती होने गया. टीचर ने उससे पूछा बेटे आपकी मम्मी का क्या नाम है

इस पर वो मासूमियत से बोला अभी नाम नही रखा. बस प्यार से मम्मी मम्मी बुलाता हूं’

मदर्स डे पर मां के प्यार को सलाम.

 

Monica Gupta

Sirsa

Haryana

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May

09

कहानी … मेहमान

Posted By: monicagupta on May 9, 2012 at 10:11 am

मेहमान !!!

 

मदर्स डे के उपलक्ष मे रवि मोहन बहुत व्यस्त चल रहे थे. जगह जगह उनकी माँ के बारे मे कविताए, विचार वाहवाही बटोर रहे थे.इसी सिलसिले मे आज उन्हे श्रेष्ठ रचानाकार के रुप मे भी सम्म्मनित किया जाना था.अपने लेखो का पुलिंदा लिए वो वहां पहुच चुके थे. तभी घर से मैसेज आया कि मेहमान आ गए है. धंटा भर अपनी रचनाए सांझा करने के बाद उन्होने आयोजको से कहा कि उनके घर मेहमान आए है इसलिए जाना पडेगा.एक आयोजक ने ऐसे ही पूछ लिया कि कौन “मेहमान” तो वो बोले, “माँ” आई है.सभी आयोजको के चेहरे का रंग उतर गया.जो व्यक्ति इतनी बढ चढ कर बाते बना रहा था. माँ को भगवान का दर्जा दे रहा था. असल जिंदगी मे माँ उसके लिए सिर्फ एक “मेहमान” स्वरुप ही है..!!:(

 

मोनिका गुप्ता

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